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Delhi Ordinance Case: संविधान पीठ के पास भेजा जा सकता है अध्यादेश का मामला

केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच तनातनी एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में है. दिल्ली में केंद्र सरकार की ओर से लाए अध्यादेश पर सुप्रीम कोर्ट इस हफ्ते गुरुवार को होने वाली सुनवाई में यह तय करेगा कि इस अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली सरकार की याचिका को संविधान पीठ के समक्ष भेजा जाए या नहीं. हालांकि सुनवाई के दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ ने मामले को संविधान पीठ के समक्ष भेजने का संकेत दिए हैं. साथ ही कोर्ट ने एक अन्य मामले में कहा कि डीईआरसी के अध्यक्ष पद को लेकर एलजी और सीएम को मिलकर एक नाम तय करना चाहिए.

सुनवाई के दौरान सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि मुद्दा यह है कि संसद के पास सूची 2 या सूची 3 में किसी भी प्रविष्टि के तहत कानून बनाने की शक्ति है या नहीं. आपने अध्यादेश के इस खंड 3 के जरिए यह कहा है कि राज्य के पास विधायिका प्रविष्टि 41 के तहत बिल्कुल भी कानून बनाने का अधिकार नहीं है.

अध्यादेश लाने की जरुरत क्यों पड़ी
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से हलफनामा दाखिल में जानकारी दी गई कि आखिर उसे अध्यादेश लाने की जरूरत क्यों पड़ी? केंद्र ने कहा कि दिल्ली के मंत्रियों ने सोशल मीडिया पर आदेश अपलोड किए, जिसके बाद अधिकारियों की तलाश शुरू हो गई.

केंद्र की ओर से कहा गया कि आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार ने सतर्कता अधिकारियों को निशाना बनाया और रात 11 बजे के बाद फाइलों पर कब्जा करने के लिए सतर्कता अधिकारियों तक पहुंच बना ली.

संविधान पीठ के पास भेजे जाने पर होगा फैसला
सीजेआई ने कहा कि 3 प्रविष्टियां हैं, जिन पर दिल्ली सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता है. उन्होंने जो किया है वह यह है कि 239 AA (vii) के तहत शक्ति का इस्तेमाल करके, उन्होंने सेवाओं को दिल्ली सरकार के नियंत्रण से बाहर करने के लिए संविधान में संशोधन किया है. क्या यह अनुमति योग्य है? मुझे नहीं लगता कि किसी भी फैसले ने इसे कवर किया है. हम इस मसले को संविधान पीठ के समक्ष भेजना चाहते हैं. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई गुरुवार को करेगा.

वहीं केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच पावर को लेकर तनातनी फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. दिल्ली सरकार की ओर से DERC के अध्यक्ष पद पर पूर्व जज जस्टिस उमेश कुमार की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल को बैठकर नियुक्ति करनी चाहिए.

हर मसले पर SC आना जरुरी नहींः CJI चंद्रचूड़
सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि क्या एलजी और सीएम केजरीवाल मिलकर डीईआरसी के अध्यक्ष पद के लिए एक सहमत नाम दे सकते हैं और हम उसे फिलहाल नियुक्त कर सकते हैं. हर मसले के लिए सुप्रीम कोर्ट आना जरूरी नहीं है.
वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट से कहा कि मुझे निर्देशों की आवश्यकता नहीं है. मैं दिल्ली एलजी की ओर से पेश हुआ हूं. दिल्ली सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह चमत्कार ही होगा कि अगर दोनों एक नाम पर राजी हो जाएं.
इस पर सीजेआई ने कहा कि दोनों संवैधानिक पदाधिकारियों को राजनीतिक कलह से ऊपर उठना चाहिए और उन्हें डीईआरसी के अध्यक्ष के लिए मिलकर एक नाम सुझाना चाहिए.

हालांकि एलजी की ओर से कोर्ट में पेश साल्वे ने कहा कि जब दिल्ली सरकार के वकील कहते हैं कि उन्हें मामले में कोई उम्मीद नहीं है, जबकि उनकी पहली प्रतिक्रिया यह होनी चाहिए कि हां यह किया जा सकता है. सीजेआई ने फिर कहा कि मेरे पास कई नाम हैं, जो इस पद को स्वीकार करने के इच्छुक होंगे. सिंघवी ने कहा कि हम कल मंगलवार को दिल्ली एलजी से संपर्क करेंगे.सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लेकर नोटिस जारी किया और संविधान पीठ के समक्ष मामला भेजने को कहा. डीईआरसी अध्यक्ष पद के मामले पर भी कोर्ट में गुरुवार को ही सुनवाई होगी.

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