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पुतिन के प्लान से छिड़ेगा धर्मयुद्ध, आमने-सामने होंगे ईसाई-मुस्लिम मुल्क!

इजराइल और हमास की जंग की सबसे बड़ी वजह है यरूशलम की अल अक्सा मस्जिद. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अब इसी मस्जिद को आधार बनाकर धर्मयुद्ध छेड़ने का प्लान तैयार कर लिया है. इसकी पटकथा 26 फरवरी को मॉस्को में लिखी जाएगी. रूस की राजधानी में इजराइल से युद्ध लड़ने वाले सभी संगठन 26 फरवरी को मॉस्को में पुतिन के साथ बैठक करने वाले हैं.

यूक्रेन और गाजा इस समय दुनिया के दो बड़े रणक्षेत्र हैं. दोनों रणक्षेत्र अमेरिका के विरुद्ध खुले हैं. दोनों रणक्षेत्रों में जारी भीषण जंग अब और प्रचंड होने वाली है. अभी तक यूक्रेन के रणक्षेत्र की कमान पुतिन के हाथ थी, लेकिन अब गाजा के रणक्षेत्र की कमान भी पुतिन ने अपने हाथ ले ली है. व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के मददगार अमेरिका से प्रतिशोध का ऐसा प्लान तैयार किया है जो अमेरिका के अरब सहयोगियों को भी उसके खिलाफ खड़ा कर सकता है.

पुतिन के इस प्लान का आधार है कि गाजा का युद्ध और इजरायल की नेतन्याहू सरकार का एक फैसला. हमास-इजराइल की जंग से पूरे अरब में तनाव है लेकिन अब नेतन्याहू सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जो इस तनाव को धर्मयुद्ध में बदल देगा और तनाव के इस बारूद में पुतिन ने चिंगारी लगाने की व्यवस्था कर दी है.10 मार्च से रमजान की शुरुआत हो रही है और नेतन्याहू सरकार ने रमजान से पहले अल अक्सा मस्जिद में प्रवेश पर पाबंदी लगाने का ऐलान किया है. मक्का-मदीना के अलावा दुनिया भर के मुसलमान रमजान में अल अक्सा मस्जिद भी जाते हैं. यरुशलम में अल अक्सा मस्जिद को इस्लाम में मक्का और मदीना के बाद तीसरा सबसे पवित्र स्थल बताया गया है.

अल-अक्सा मस्जिद और डोम ऑफ द रॉक एक ही परिसर में बने हैं. डोम ऑफ द रॉक के बारे में मान्यता है कि इसी जगह से इस्लाम के आखिरी पैगंबर मोहम्मद ने जन्नत का सफर किया था. इसी 2 एकड़ के परिसर में यहूदियों का टेंपल माउंट है, लेकिन अब सिर्फ इसकी एक दीवार बची है जिसे ‘वेस्ट वॉल’ या ‘वेलिंग वॉल’ कहा जाता है और यह यहूदियों के लिए सबसे पवित्र जगह है. यहीं पर अल अक्सा मस्जिद परिसर के अलावा ईसाइयों के इलाके में ‘द चर्च ऑफ द होली सेपूल्कर’ है.

पूरे अरब जगत में गुस्सा
अल अक्सा में मुसलमानों के प्रवेश पर पाबंदी लगाने से पूरे अरब जगत में गुस्सा भड़क गया है और पुतिन ने इस गुस्से को अमेरिका के खिलाफ इस्तेमाल करने की तैयारी कर ली है. राष्ट्रपति पुतिन के एक बयान और एक प्लान से सब साफ हो गया है. उन्होंने कहा कि ये बहुत महत्पूर्ण और महान मानवीय काम है. हमें हर हाल में गाजा के उन लोगों की मदद करनी चाहिए जो वर्तमान हालात का शिकार हैं. हम देख रहे हैं कि गाजा में क्या हो रहा है और इसलिए लोगों की मदद करना हमारा पवित्र दायित्व है.

सार्वजनिक मंच से पुतिन ने ऐलान कर दिया है कि रूस गाजा के लोगों की मदद को अपना पवित्र दायित्व मानता है और इसके साथ ही ऐलान ये भी हो चुका है कि मॉस्को में अमेरिका के खिलाफ महामंच सजने वाला है. पुतिन सरकार ने हमास, इस्लामिक जिहाद, फिलिस्तीनी अथॉरिटी, फिलिस्तीनी संघर्ष गुटों को मॉस्को आने का न्योता दिया है. 26 फरवरी को फिलिस्तीनी गुटों को मॉस्को बुलाया गया है. पुतिन गाजा युद्ध से उपजे दो हालात का फायदा उठाने की तैयारी हैं.

पहला है अल अक्सा में रमजान के दौरान प्रवेश पर प्रतिबंध और दूसरा है नेतन्याहू सरकार का गाजा विभाजन फैसला. इजराइल सरकार ने कहा था कि गाजा पर कब्जा करने का इरादा नहीं है लेकिन अब यही हो रहा है. इजराइली इंजीनियरिंग कोर के ट्रैक्टर और बुलडोजर गाजा विभाजन का काम शुरू कर चुके हैं. इजराइल का प्लान है कि नाहल ओज़ से भू मध्य सागर तक गाजा का विभाजन कर दिया जाए. नाहल ओज से गाजा के पश्चिमी समुद्र तट तक एक हाइवे बनाया जा रहा है. इसे हाइवे 749 का विस्तार कहा गया है. ये हाइवे गाजा पट्टी को दो हिस्सों में बांट देगा.

उत्तरी गाजा के वहाश जैतोन, रिमाल, जबालिया, बेत लाहिया और बेत हैनॉन सहित कई इलाके पश्चिमी गाजा से कट जाएंगे. इस क्षेत्र पर इजराइल का कब्जा हो जाएगा. ये पूरा इलाका इजराइली सेना समतल कर चुकी है और नागरिकों को दक्षिणी गाजा भेजा जा चुका है. हाईवे बनने के बाद दक्षिणी गाजा पहुंच चुके लोगों का संपर्क इस क्षेत्र से हमेशा के लिए काट दिया जाएगा.

क्या चाहते हैं पुतिन?
फिलिस्तीन का पुनर्निर्माण और अल अक्सा की आजादी ये दो ऐसे भावनात्मक मुद्दे हैं जिन पर अरब के सभी देश इजराइल, अमेरिकी और यूरोपीय नीतियों के खिलाफ हैं. पुतिन अब यही चाहते हैं कि संयुक्त अरब को अमेरिका और यूरोप के खिलाफ जंग में उतार दिया जाए. पुतिन अल अक्सा में प्रवेश पर प्रतिबंध और गाजा के विभाजन को धर्मयुद्ध में बदलना चाहते हैं.

पुतिन गाजा की जंग को मुसलमान बनाम ईसाई की जंग बनाने की प्लानिंग कर चुके हैं. अल अक्सा के मुद्दे पर अरब के मुस्लिम देशों को एकसाथ लाकर यूरोप के खिलाफ उतारे जाने का प्लान है. पुतिन की धर्मयुद्ध टीम के सदस्य हैं अरब के PIJ, हमास, PA, हूती, हिज्बुल्लाह, जॉर्डन, सीरिया, इराक और ईरान, जिसके कमांडर पुतिन हैं. पुतिन इस टीम को बाइडेन की टीम से जंग लड़ाना चाहते हैं. इस टीम में हैं इजरायल, EU और NATO.

यूक्रेन को लगातार हथियारों की मदद देने के बाद यूरोप के देश इस वक्त सबसे कमजोर हालत में हैं. नवंबर में जर्मनी ने कहा कि यूक्रेन को हथियार देने से इमरजेंसी रिजर्व खत्म हो चुका है. फ्रांस ने दिसंबर में कहा कि आत्मरक्षा के लिए हथियार नहीं बचे हैं. जनवरी में UK ने कहा कि यूक्रेन दिए हथियार दोबारा बनाने में 10 साल लग जाएंगे. फरवरी में ही एस्टोनिया, पोलैंड, स्वीडन ने कहा है कि रूस के साथ जंग लड़ने की स्थिति में नहीं हैं. फरवरी में ही EU ने आत्मरक्षा के लिए परमाणु बम मांगे हैं. पुतिन जानते हैं कि यही सही मौका है जब यूरोप वर्सेज अरब की जंग शुरू कराई जाए और कमजोर पड़ चुका यूरोप यानी बाइडेन की टीम घुटने टेकने को मजबूर हो जाए

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